अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा
Action Inspirational
कलम का सिपाही,
बलिदानों का राही,
पुलकित होता प्राणों से,
त्वरा का अनुगामी ।
दुर्गम पथ का साथी,
छांव ढूंढता उजियारे में,
अमर होती प्रथायें,
पाषाण तोड़ती हवायें,
कुदाल नहीं चलाता,
कलम का सिपाही।
इत्तफाक जिंदग...
कान्हा
सर्द हवाएं
कभी ख़ुश तो कभ...
मेरा ग़म
अद्भुत बालक क्रूर दानवता की दुष्ट प्रवाह पर प्रहार शिवा सत्य सत्यार्थ।। अद्भुत बालक क्रूर दानवता की दुष्ट प्रवाह पर प्रहार शिवा सत्य सत्यार्थ।।
आतंकी का खौफ बताओं, कब तक राज करेगा अब घाव लगे हैं जो हृदय पर, उनको कौन भरेगा अब बतलाओ क्या उत्तर ... आतंकी का खौफ बताओं, कब तक राज करेगा अब घाव लगे हैं जो हृदय पर, उनको कौन भरेगा अ...
एक एक कर मेघनाद ने शस्त्र अनेकों मार दिए मेघनाद ने हनुमान पर जाने कितने ही वार किए एक एक कर मेघनाद ने शस्त्र अनेकों मार दिए मेघनाद ने हनुमान पर जाने कितने ही वा...
कितने कवि लेखक चले गये अब, साहित्य जगत में अकेला ही छोड़। कितने कवि लेखक चले गये अब, साहित्य जगत में अकेला ही छोड़।
मैं लोग को आदिशक्ति क्या होती है अहसास दिलाना है। मैं लोग को आदिशक्ति क्या होती है अहसास दिलाना है।
अभी-अभी तो ख्वाहिशों ने की थी उड़ान की शुरुआत अभी-अभी तो ख्वाहिशों ने की थी उड़ान की शुरुआत
व्याधियां प्रदत्त सूक्ष्म जीवों से, मानव पर तो हैं ढा रहीं प्रलय। व्याधियां प्रदत्त सूक्ष्म जीवों से, मानव पर तो हैं ढा रहीं प्रलय।
यह कश्मीर तो ना देंगे हम वह कश्मीर भी ले लेंगे इस धरती मैया की खातिर जान भी अपनी दे दे यह कश्मीर तो ना देंगे हम वह कश्मीर भी ले लेंगे इस धरती मैया की खातिर जान भी अ...
आँचल में छुपा कर घर रखा तो वीर कहाँ से आयेंगे जब मुश्किल से टकराएंगे अभिनन्दन बन पायेंगे। आँचल में छुपा कर घर रखा तो वीर कहाँ से आयेंगे जब मुश्किल से टकराएंगे अभिनन्दन...
मर्यादा मर रही प्रतिदिन अत्याचार, अन्याय, भय, भ्रष्टाचार पर्याय युवा बन रहा है मर्यादा मर रही प्रतिदिन अत्याचार, अन्याय, भय, भ्रष्टाचार पर्याय युवा बन रह...
उन सपनों को अब जीना चाहती हूँ तुम्हारे घर में एक छोटा सा कोना चाहती हूँ उन सपनों को अब जीना चाहती हूँ तुम्हारे घर में एक छोटा सा कोना चाहती हूँ
सब को आँचल की छाया में बिठाकर, खुद सहती है धूप सब को आँचल की छाया में बिठाकर, खुद सहती है धूप
असंख्य शत्रु सामने, गिरे न स्वेद भाल से। स्वदेश के लिए लड़ो, महा कराल काल से॥ असंख्य शत्रु सामने, गिरे न स्वेद भाल से। स्वदेश के लिए लड़ो, महा कराल काल से॥
ऐसे गद्दारों को आजादी से रहने का अधिकार नहीं होगा, ऐसे गद्दारों को आजादी से रहने का अधिकार नहीं होगा,
जिंदगी अपने सारे माँ भारती तेरे आँचल में ही मैं गुजार दूँ। जिंदगी अपने सारे माँ भारती तेरे आँचल में ही मैं गुजार दूँ।
कोई दवा मिलती ही नहीं, मैं रो पड़ता हूं। मैं लिखता हूं, मिटाता हूं। कोई दवा मिलती ही नहीं, मैं रो पड़ता हूं। मैं लिखता हूं, मिटाता हूं।
नई ऊर्जा और हिम्मत का संचार कर खुद को खुद के लिए खास बना पाती हूँ मैं।। नई ऊर्जा और हिम्मत का संचार कर खुद को खुद के लिए खास बना पाती हूँ मैं।।
अब चला चली की बेला है, गुडबाय सभी को करता हूं।। अब चला चली की बेला है, गुडबाय सभी को करता हूं।।
आप निश्चिंत रहो मैंने सब में जहां मिलावट करनी थी सब कर दी। आप निश्चिंत रहो मैंने सब में जहां मिलावट करनी थी सब कर दी।
जब अचानक से लड़कियों की शिक्षा लेकर मची थी क्रांति और लोग बंद करने लगे थे जब अचानक से लड़कियों की शिक्षा लेकर मची थी क्रांति और लोग बंद करने लगे थे