अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा
Action Inspirational
कलम का सिपाही,
बलिदानों का राही,
पुलकित होता प्राणों से,
त्वरा का अनुगामी ।
दुर्गम पथ का साथी,
छांव ढूंढता उजियारे में,
अमर होती प्रथायें,
पाषाण तोड़ती हवायें,
कुदाल नहीं चलाता,
कलम का सिपाही।
इत्तफाक जिंदग...
कान्हा
सर्द हवाएं
कभी ख़ुश तो कभ...
मेरा ग़म
उसके लिए भूगोल चाहे धरती का हो या स्त्री का एक ही उद्देश्य के निमित्त होता है। उसके लिए भूगोल चाहे धरती का हो या स्त्री का एक ही उद्देश्य के नि...
अभी-अभी तो ख्वाहिशों ने की थी उड़ान की शुरुआत अभी-अभी तो ख्वाहिशों ने की थी उड़ान की शुरुआत
कड़वाहट में भी पल भर, मीठापन घोल जाती हैं कड़वाहट में भी पल भर, मीठापन घोल जाती हैं
औरों के ही हो प्यार के रंग हज़ार, मेरे तो सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम प्यार। औरों के ही हो प्यार के रंग हज़ार, मेरे तो सिर्फ़ और सिर्फ़ तुम प्यार।
असंख्य शत्रु सामने, गिरे न स्वेद भाल से। स्वदेश के लिए लड़ो, महा कराल काल से॥ असंख्य शत्रु सामने, गिरे न स्वेद भाल से। स्वदेश के लिए लड़ो, महा कराल काल से॥
बन गयी थी हर गली शहर की मौज-ए-खून की बन गयी थी हर गली शहर की मौज-ए-खून की
पढ़कर हर शख्स झूमता है उसके हर फ़साने पर। पढ़कर हर शख्स झूमता है उसके हर फ़साने पर।
कुछ हक़ तो उसका भी था जिसने हमदम हमसफर बन सात जन्मो के लिए साथ निभाने का वचन दिया, कुछ हक़ तो उसका भी था जिसने हमदम हमसफर बन सात जन्मो के लिए साथ निभाने का वचन दिया...
वो नहीं जानते थे की उनकी खुले आम दिन दहाड़े नीलामी होगी वो नहीं जानते थे की उनकी खुले आम दिन दहाड़े नीलामी होगी
प्रधान मंत्री जी, स्पष्ट उद्देश्य के साथ, साल दर साल भारत का नेतृत्व कर रहे हैं। प्रधान मंत्री जी, स्पष्ट उद्देश्य के साथ, साल दर साल भारत का नेतृत्व कर रहे ह...
उपजे अन्न अपार, हटे जगत की उदासी खूब बने बरसात, रहे ना धरती प्यासी। उपजे अन्न अपार, हटे जगत की उदासी खूब बने बरसात, रहे ना धरती प्यासी।
दबे-कुचले लोगों की आवाज़ को अल्फाज़ के रूप में अंकित करना होगा, दबे-कुचले लोगों की आवाज़ को अल्फाज़ के रूप में अंकित करना होगा,
मुश्किल है सफर में उनको हम अब ना पाएंगे। मुश्किल है सफर में उनको हम अब ना पाएंगे।
चलो, हम आत्मनिर्भर भारत की जागृति हेतु ये दिव्य-दीप जलाएँ...!! चलो, हम आत्मनिर्भर भारत की जागृति हेतु ये दिव्य-दीप जलाएँ.....
तय मुकाम पाकर होगा अनुपम सबेरा दुआओं की नौका... तय मुकाम पाकर होगा अनुपम सबेरा दुआओं की नौका...
हमारा क्या है अब हम तुम्हारा शहर छोड़ते हैं। हमारा क्या है अब हम तुम्हारा शहर छोड़ते हैं।
तन्हा कहाँ हूँ रास्ता तो है संग मेरे। यह राह जानिबे घर को छोड़ती है। तन्हा कहाँ हूँ रास्ता तो है संग मेरे। यह राह जानिबे घर को छोड़ती है।
कर्म ही पूजा है दिल को सबक ये रटा तय मुकाम पाने पे होगा सुकून अपार कर्म ही पूजा है दिल को सबक ये रटा तय मुकाम पाने पे होगा सुकून अपार
इनके खिलने खिलाने से, हमको क्या फ़ायदा ? जब बुत परस्ती में इनकी, जरूरत नहीं। इनके खिलने खिलाने से, हमको क्या फ़ायदा ? जब बुत परस्ती में इनकी, जरूरत नहीं।
मांगा जो खुदा से"रोहित"ये जहां मैं, कुबूल ए दुआ हो तुम...... मांगा जो खुदा से"रोहित"ये जहां मैं, कुबूल ए दुआ हो तुम......