STORYMIRROR

राही अंजाना

Drama

2  

राही अंजाना

Drama

ख्वाहिशें

ख्वाहिशें

1 min
163

ख्वाहिशें हर एक रोज हमसे झगड़ती रहीं,

अंजान होकर के खुद पर ही अकड़ती रहीं।


समझाया बहुत मगर समझी एक बार नहीं,

हर बार चेहरा बदलकर मुझको पकड़ती रहीं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama