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राही अंजाना

Abstract

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राही अंजाना

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सुफल

सुफल

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खबर जो पास थी तुम तक क्यों पहुंचा हम नहीं पाए।

जो देखा तुमको तो अश्रु क्यों हम से थम नहीं पाए।

जो की लंबी प्रतीक्षा का सुफल पाना जरूरी था,

लगी हम को भी ठोकर पर कभी मरहम नहीं पाए।



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