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राही अंजाना

Abstract

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राही अंजाना

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भूल गया

भूल गया

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नींद में सोया एक रात सुबह उठना भूल गया,

देख कर चेहरा उसका चेहरा अपना भूल गया,


निकला था जिस पल रास्ते पर प्यार के उसके, 

"राही" खुद के ही घर का अपना रास्ता भूल गया।।



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