STORYMIRROR

Anumeha Rao

Drama

2  

Anumeha Rao

Drama

कभी कभी

कभी कभी

1 min
113

कभी कभी मन चाहता है,

चलती जाऊँ नील गगन में,

कभी कभी मन चाहता है,

जी भर के गुनगुनाऊं,

कभी कभी मन चाहता है,

समुद्र की लहरों सी बहती जाऊँ,

कभी कभी मन चाहता है,

फूल बनकर बाग में महकूँ,

कभी कभी मन चाहता है,

रुकूं नहीं बस चलती जाऊँ,

कभी कभी मन चाहता है,

झुकूं नहीं बस उठती जाऊँ,

कभी कभी मन चाहता है,

बस आगे आगे बढ़ती जाऊँ


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama