STORYMIRROR

aam aadmi

Drama

3  

aam aadmi

Drama

तेरा हमदर्द

तेरा हमदर्द

1 min
368

वो वक्त था जो गुजर गया

तेरी यादों में 

मैं हर वक्त तड़पता था

अब मार दिया मैंने उस कीड़े को 

जो तेरे लिए मेरे दिल में  

उस वक्त फड़कता था। 


अब याद भी करूँ 

तो तेरी कोई याद नहीं आती है 

तेरे ख्वाबों में मैंने भटकना छोड़ दिया है 

वो भी एक वक्त था 

जब ये दिल सिर्फ तेरे लिए तड़पता था

अब तो इस जालिम ने भी तड़पना छोड़ दिया है। 


एक गुजारिश है मेरी तुझसे 

अब कभी किसी का दिल मत तोड़ना 

क्यूंकि, हर किसी का अच्छा ईमान नहीं होता  

कई हैवान भूखे है यहाँ जिस्म के 

नोच डालेंगे तुझ नादान को 

क्यूंकि, हर कोई सच्चा इंसान नहीं होता। 



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama