STORYMIRROR

Randheer Rahbar

Drama

4  

Randheer Rahbar

Drama

"हम तुम"

"हम तुम"

1 min
577

आसमानी धुन चढ़ रही है

मन जो तेरे

आँखें खोलो

खिल रहे हैं वो सवेरे


हवा है सन सन 

बह रही है

सुन ले मन की

जो कह रही है


बहती कल कल

जल ये धारा

नित्य करती याद

जो तुझको है पुकारा


किरणों से रोशन सूर्य की

जो धरा है

तेरा चेहरा उज्जवल

सुबह -सा चहक रहा है  


ये अँधेरे सन सना सन

कह रहे हैं

तेरी बाँहों में जैसे

मन बह रहे हैं



ये करवटें अब 

ऐसे ढह रही हैं

तेरे मन की

मेरे मन से कह रही हैं


मौन चंदा

मुस्कुराता जा रहा है

तेरी आँखों का काजल

कुछ कह रहा है


अब तो ऐसे मत बनाओ

यूँ ही बातें

कट न जाएँ

बातों ही बातों में ये रातें


सुन लो लहरें मन में

जो उठ रही हैं

ना कुछ कहो, सन्नाटे की

शहनाई बज रही है


मौन तुम हो

मौन मैं भी

सो गई ये दुनिया सारी

आओ जी लें अब अपनी बारी


प्यार की धुन जो

बज रही है

ये रात तारों सी

जो सज रही है


हम तुम तन मन

खत्म अब हो ये

सन ना न सन सन

एक हों ये तन मन - तन मन।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama