जिस दिन आईना झूठ बोलने लगा
जिस दिन आईना झूठ बोलने लगा
सोचिये कि जिस दिन आईना झूठ बोलने लगा।
इंसान का चेहरा अपनी हक़ीक़त से डरने लगा।
अपने अक़्स में सच्चाई का निशान खो जायेगा।
दुनिया के हर शख़्स का जैसे ईमान सो जायेगा।
मासूम दिलों में भी कई वहम उठने लग जायेंगे।
तब नक़ाबों के पीछे कई राज़ छुपने लग जायेंगे।
फिर ईमानदारी और सच का कोई मोल न रहेगा।
रिश्तों और अपनेपन का भी कोई बोल न कहेगा।
