आचार्य आशीष पाण्डेय
Horror Action Classics
जीवन है अभिशाप जगत में
भूलूं कितना पाप जगत में
राग, द्वेष तम पुंज अनारत
विन नाप जगत में तेजी से बढ़ रहा है।।
अरण्य
शीर्षक--प्यार...
बहुत देर से आ...
जीवन
जन्महेतु
अपना दोष
राजनीति
प्रिय
मित्र
सीप
बढ़ती कमी को महसूस किया और अपने परिवार को अपना समय दिया। बढ़ती कमी को महसूस किया और अपने परिवार को अपना समय दिया।
आज उस बात को बीते हुए करीब दस साल गुज़र चुका है। आज उस बात को बीते हुए करीब दस साल गुज़र चुका है।
तक सुन पाओगे मिट जाएगा जब तेरी सृष्टि से तेरा ही विधि विधान।। तक सुन पाओगे मिट जाएगा जब तेरी सृष्टि से तेरा ही विधि विधान।।
धड़कने बढ़ने लगीं जब धुंधला दिखने लगा साया धड़कने बढ़ने लगीं जब धुंधला दिखने लगा साया
नितिन कहता है।" मैं भी बकरे का मटन खाऊंगा विथ फ्राइड राइस,!! वीरेन कहता है," चिकन मसाल नितिन कहता है।" मैं भी बकरे का मटन खाऊंगा विथ फ्राइड राइस,!! वीरेन कहता है," ...
लबों से उफ्फ ना करती थी, आँखें तूने उसकी कभी पढ़ी न थी। लबों से उफ्फ ना करती थी, आँखें तूने उसकी कभी पढ़ी न थी।
आदमी की ज़िंदगी है जैसे माटी का खिलौना टूट जाये तो जुड़ना आसान नही है। आदमी की ज़िंदगी है जैसे माटी का खिलौना टूट जाये तो जुड़ना आसान नही है।
आंखें खुल गई/अब मैं भयमुक्त थी तुम्हारा हाथ मेरे हाथों में था। आंखें खुल गई/अब मैं भयमुक्त थी तुम्हारा हाथ मेरे हाथों में था।
हृदय विदारक है तेजाबी हमला, हाय कैसे इसके क्रूर दंश से बचे अबला ? हृदय विदारक है तेजाबी हमला, हाय कैसे इसके क्रूर दंश से बचे अबला ?
नींद आती होगी कि नहीं॥ नींद आती होगी कि नहीं॥
क्या वह साया सचमुच यहाँ है, या यह सिर्फ एक ख्याल है? क्या वह साया सचमुच यहाँ है, या यह सिर्फ एक ख्याल है?
बचपन से जिस भूतिया जंगल के बारे में सुनता आ रहा था। बचपन से जिस भूतिया जंगल के बारे में सुनता आ रहा था।
आनंद का उत्सव था, मातम में बदल गया हाथ थामे कौन किसका, हर कोई डर गया। आनंद का उत्सव था, मातम में बदल गया हाथ थामे कौन किसका, हर कोई डर गया।
पर उन्हें तोड़ आगेे बढ़ने पर वह हमको सलामी दे जाएगा। पर उन्हें तोड़ आगेे बढ़ने पर वह हमको सलामी दे जाएगा।
कभी कभी तो सचमुच में वो हमको बीवी जैसी लगती है। कभी कभी तो सचमुच में वो हमको बीवी जैसी लगती है।
वो तितली पकड़ना फिर सावधानी से छोड़ देना क्या कला थी, पेड़ पर लटकना चढ़ना नदी में नहाना दो वो तितली पकड़ना फिर सावधानी से छोड़ देना क्या कला थी, पेड़ पर लटकना चढ़ना नदी में...
वो उस बियावान को भयाक्रांत कर देती है अपने रुग्ण विलाप से वो उस बियावान को भयाक्रांत कर देती है अपने रुग्ण विलाप से
अपने इस ढीठ पन का कुछ तो तुम इलाज करो ना अपने इस ढीठ पन का कुछ तो तुम इलाज करो ना
हेलोवीन के नाम से देखो मौत सिखाते हैं बच्चों को ।। हेलोवीन के नाम से देखो मौत सिखाते हैं बच्चों को ।।
बातें बहुत बिगड़ गई है। इन्हें नहीं ठीक किया जा सकता। बातें बहुत बिगड़ गई है। इन्हें नहीं ठीक किया जा सकता।