आचार्य आशीष पाण्डेय
Horror Action Classics
जीवन है अभिशाप जगत में
भूलूं कितना पाप जगत में
राग, द्वेष तम पुंज अनारत
विन नाप जगत में तेजी से बढ़ रहा है।।
अरण्य
शीर्षक--प्यार...
बहुत देर से आ...
जीवन
जन्महेतु
अपना दोष
राजनीति
प्रिय
मित्र
सीप
कुछ ने आपदा में अवसर निकाला कई ने अवसर आपदा में जानें भी दी॥ वो तुम्हारा काम खुद ही क कुछ ने आपदा में अवसर निकाला कई ने अवसर आपदा में जानें भी दी॥ वो तुम्हारा क...
कई अघोरियों के पास तो ताकते इतनी है की जो हमारे कल्पना से परे है, कई अघोरियों के पास तो ताकते इतनी है की जो हमारे कल्पना से परे है,
आना जाना सदा लगा रहा जगत, पर जो चले गये, फिर न मिलते।। आना जाना सदा लगा रहा जगत, पर जो चले गये, फिर न मिलते।।
आप वापिस आ जायेगे … फिर चावल खाने ? या इंसानी हत्या ? करने आप वापिस आ जायेगे … फिर चावल खाने ? या इंसानी हत्या ? करने
देस धर्म की आन, बचाणे लड़ी लड़ाई। देस धर्म की आन, बचाणे लड़ी लड़ाई।
बिछड़ जाने की सिला ना दूंगा खुनी हाथ से प्यार लिखे जा रहा हूँ .. बिछड़ जाने की सिला ना दूंगा खुनी हाथ से प्यार लिखे जा रहा हूँ ..
आज मैंने मन की ऊँगली पकड़ कर और मन ने मेरी ऊँगली पकड़ उधर गए जहाँ डर की बंदिशें थीं ... आज मैंने मन की ऊँगली पकड़ कर और मन ने मेरी ऊँगली पकड़ उधर गए जहाँ डर की...
तुमने तोड़ा शिवजी का धनुष है तुम विष्णु का ही एक अवतार हो। तुमने तोड़ा शिवजी का धनुष है तुम विष्णु का ही एक अवतार हो।
बेशक सोचें वे कि कैसे उद्देश्यों को लेकर वे चले। बेशक सोचें वे कि कैसे उद्देश्यों को लेकर वे चले।
बीतेगी खुद पे तब न्याय करोगे, भरे बूँद से सागर है। फूटेगी जब ले डूबेगी मजबूत नहीं अब गागर है। बीतेगी खुद पे तब न्याय करोगे, भरे बूँद से सागर है। फूटेगी जब ले डूबेगी मजबूत नह...
ज़िंदगी बेहद मज़ाक सी लग रही है, मगर मैं मर भी तो नहीं पा रहा।। ज़िंदगी बेहद मज़ाक सी लग रही है, मगर मैं मर भी तो नहीं पा रहा।।
जब कुछ बूंदें उस पर पानी की पड़ी छुप गई दीवार के नीचे, जैसे जब कुछ बूंदें उस पर पानी की पड़ी छुप गई दीवार के नीचे, जैसे
जहां मैं कभी ख़ुशी से रहता था वो अब श्मशान हो गया। जहां मैं कभी ख़ुशी से रहता था वो अब श्मशान हो गया।
मानव करे समान, तोड़कै वर्ण व्यवस्था। मानव करे समान, तोड़कै वर्ण व्यवस्था।
यह कहते हैं कोई भी बुरी शक्ति सफ़ेद रौशनी में नहीं आ सकती। यह कहते हैं कोई भी बुरी शक्ति सफ़ेद रौशनी में नहीं आ सकती।
आज उसी जंगल में, उस झाड़ के बीच एक प्रेतात्मा बन के घूम रही है। आज उसी जंगल में, उस झाड़ के बीच एक प्रेतात्मा बन के घूम रही है।
मैने नींद को पकड़ लिया और थोड़ी ही देर में एक सपने ने मुझे खुद में जकड़ लिया । मैने नींद को पकड़ लिया और थोड़ी ही देर में एक सपने ने मुझे खुद में जकड़ ...
हर किसको समझ नहीं पाए, हर किसको को समझा नहीं पाए। हर किसको समझ नहीं पाए, हर किसको को समझा नहीं पाए।
तू जानता है, ये मैं हूं। मैं तेरा खौफ हूं। तू जानता है, ये मैं हूं। मैं तेरा खौफ हूं।
और ये सब देख देखते दुखी रहना हमारी नियति बनती जा रही है॥ और ये सब देख देखते दुखी रहना हमारी नियति बनती जा रही है॥