आचार्य आशीष पाण्डेय
Horror Action Classics
जीवन है अभिशाप जगत में
भूलूं कितना पाप जगत में
राग, द्वेष तम पुंज अनारत
विन नाप जगत में तेजी से बढ़ रहा है।।
अरण्य
शीर्षक--प्यार...
बहुत देर से आ...
जीवन
जन्महेतु
अपना दोष
राजनीति
प्रिय
मित्र
सीप
आकर मुझे ले जाओ ना माँ तुम छुपी किधर मैं ढूंढ़ती यहाँ वहाँ। आकर मुझे ले जाओ ना माँ तुम छुपी किधर मैं ढूंढ़ती यहाँ वहाँ।
बजे सुबह के साढ़े चार, अंधेरा कमरा है यार। बजे सुबह के साढ़े चार, अंधेरा कमरा है यार।
कहना है तो बस करना होगा, मन में कोई दुविधा मत रखो। कहना है तो बस करना होगा, मन में कोई दुविधा मत रखो।
ये जिंदगी शायद मैंने पछतावे में गुज़र ली। ये जिंदगी शायद मैंने पछतावे में गुज़र ली।
दीबा है मेरा नाम मेरे रुप कई हैं हूँ धूप कहीँ और कहीँ सावन की झड़ी हूँ दीबा है मेरा नाम मेरे रुप कई हैं हूँ धूप कहीँ और कहीँ सावन की झड़ी ...
रह सावधान और शारीरिक दूरी रखकर, लगा डबल मास्क,स्वच्छता को अपनाना है। रह सावधान और शारीरिक दूरी रखकर, लगा डबल मास्क,स्वच्छता को अपनाना है।
हो जाती है फिर online होने पर तकरार फिर हो जाता है गायब पलभर में Online प्यार...! हो जाती है फिर online होने पर तकरार फिर हो जाता है गायब पलभर में Online प...
कच्ची थी डाल उसको पूछूँ तो वो ही टूट गयीl कच्ची थी डाल उसको पूछूँ तो वो ही टूट गयीl
लेकिन उसका क्या जो आज भी ईंट जुटा रहा है। लेकिन उसका क्या जो आज भी ईंट जुटा रहा है।
इंसानों यह तुम्हारे ही अंदर का एक जानवर है... इंसानों यह तुम्हारे ही अंदर का एक जानवर है...
हो जाए बलात्कार तो लड़की को दोष देते हैं लड़की से ही क्यों 50 सवाल पूछते हैं। हो जाए बलात्कार तो लड़की को दोष देते हैं लड़की से ही क्यों 50 सवाल पूछते हैं...
जिसने इतने जीवन किये बर्बाद हर गर्मी मनहूस आयेगी याद। जिसने इतने जीवन किये बर्बाद हर गर्मी मनहूस आयेगी याद।
हम दोनों है जैसे दीया ओर बाती हमसफर हो मेरे तुम ही जीवनसाथी। हम दोनों है जैसे दीया ओर बाती हमसफर हो मेरे तुम ही जीवनसाथी।
नहीं पता कैसे वो माने, यूं देर लगेगी आने में। नहीं पता कैसे वो माने, यूं देर लगेगी आने में।
जिस दिन कलम छूट जाये, लगता हूं जगत बड़ा अनाथ। जिस दिन कलम छूट जाये, लगता हूं जगत बड़ा अनाथ।
जैसे ही कुछ कदम उठाए हम दोनों ने, अचानक एक काली बिल्ली सामने आई। जैसे ही कुछ कदम उठाए हम दोनों ने, अचानक एक काली बिल्ली सामने आई।
अब और नहीं, अब बस भी कर एक कुदरत तेरे कहर को............ अब और नहीं, अब बस भी कर एक कुदरत तेरे कहर को............
बस ये प्रकिया यूँ ही चलती रहेगी इसमें अंकुश नही लग सकता। बस ये प्रकिया यूँ ही चलती रहेगी इसमें अंकुश नही लग सकता।
क्या उसे लिखें क्या उसे कहें जिस ने कर के बे-जान, फिर जान-ए-जाँ भी लिखा है। क्या उसे लिखें क्या उसे कहें जिस ने कर के बे-जान, फिर जान-ए-जाँ भी लिखा है...
विसर्जन के बाद बस कुछ पल मौन ही साथ होता है। विसर्जन के बाद बस कुछ पल मौन ही साथ होता है।