जीवन एक रंग मंच
जीवन एक रंग मंच
जीवन तो एक रंग मंच है।
हर दिन होता यहाँ रोमांच है।
कभी थिरकते पैरों में पायल।
दिल लोगों के हो जाते घायल।
खुशियों के बिखरे कई रंग यहाँ हैं।
फिर भी दुख के कई रंज यहाँ हैं।
कहीं पर फूल खिले हैं खुशियों के।
घुमड़ते हैं बादल कहीं दुखों के।
ढोल नताशों की धुन पर थिरकते रहना है।
सिर पर रख गागर रस्सी पर चलते रहना है।
भांति भांति के करतब रोज दिखाने पड़ते हैं।
बस इसी तरह से हम सब आगे बढ़ते रहते हैं।
कोई बन कर जोकर हंसी बिखराता है।
बाँध घुंघरू पैरों में कोई नृत्य दिखाता है।
राग सुहानी में कोई सुंदर गीत सुनाता है।
दुनिया का ये रंग मंच रंग नए दिखलाता है।
अनगिनत करतबों से भरा ये जीवन है।
कभी दिखाती कुदरत भी अपनापन है।
कुदरत भी कभी बरसाती है ज्वालाएं।
कभी सजाती धरा जैसे फूलों की मालाएं ।
