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राही अंजाना

Children

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राही अंजाना

Children

जब हम छोटे बच्चे थे

जब हम छोटे बच्चे थे

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दोस्त हमारे बचपन के

कितने सीधे सच्चे थे,

खेल खिलौने गुड़िया गुड्डे

सब हमसे बोला करते थे,

जब हम छोटे बच्चे थे।


बैग किताबें बिस्तर पर हम

अक्सर फेंका करते थे,

फिजिक्स केमिस्ट्री की मिस्ट्री में

फँसकर हम अक्सर रोया करते थे,

जब हम छोटे बच्चे थे।


पेपर में जब मास्टर हमको

देख के घूरा करते थे,

तब इशारों में उत्तर हम

प्रश्नों के खुल कर पूछा करते थे,

जब हम छोटे बच्चे थे।


मम्मी से छुपकर हम जब भी

बाहर खेला करते थे,

पापा यहाँ-वहँ अक्सर फिर

हमको ढूँढा करते थे,

जब हम छोटे बच्चे थे।


बड़े हुए जबसे हम देखो

सब हमसे आशा रखते हैं,

उम्मीदों की जंजीरो में

हमको जकड़ा करते हैं,

इससे तो बचपन के

छोटे-मोटे किस्से अच्छे थे,

जब हम छोटे बच्चे थे।


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