छप छप करते अपने पांव ! (मौसम)
छप छप करते अपने पांव ! (मौसम)
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टप टप बरसें दिन और रात,
झूम के अब आई बरसात।
काले मेघा डरा डरा कर,
छप्पर पर करते आघात।।
पेंड़ पुकारें घन तुम बरसो,
प्रियतम पिया के बिन जब तरसे।
लगती नदी कुलांचे भरने,
झूम झूम कर गाते झरने।।
सड़क पे चलने लगती नांव,
छप्पर छोड़ के भागे गांव।
बच्चे खेलें घर - घर नांव,
छप - छप करते अपने पांव।।
