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Avneet kaur

Romance Tragedy Fantasy

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Avneet kaur

Romance Tragedy Fantasy

इज़हार

इज़हार

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किताब-ए-दिल को बयाँ करना चाहती हूँ

अपने ख्वाबों में आपसे मिलना चाहती हूँ

मोहब्बत तो आज भी ज़िंदा है दिल में

बस उस मोहब्बत को महसूस करना चाहती हूँ


दस्तक तो दे बैठे थे आप हमारे दिल में

पर तालीम न सीख सके , हमसे इश्क़ करने की

हसरत तो आज भी ज़िंदा है हमारे दिल में

पर हिम्मत नहीं है आपके रु-ब-रु होने की


कुछ खास महफिलों में,

आपकी तारीफ करते हैं

क्या इजाज़त है...आपसे बात करने की?

आपसे मोहब्बत करके,

शायर तो बन गए हैं

क्या कोशिश कर सकती हूँ...

उसको एक सादे पन्ने पर लिखने की?


इबादत करके माँगते हैं आपको

उस खुदा से,

अपने अंदर उठे हर सवाल के जवाब माँगते हैं,

उस खुदा से,

मिलना चाहती हूँ उसी जगह आपसे

मेरी कलम ने लिखा, जिस जगह मिलना आपसे...


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