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Zuhair abbas

Tragedy


4.4  

Zuhair abbas

Tragedy


इंतज़ार

इंतज़ार

1 min 130 1 min 130

अब ज़रा सुकू हुआ थी की

ना जाने किसने उसे खबर दी 

वो ख़्वाब में आये और

मुझे फिर से बेचैन कर गए।


होकर जुदा भी वो हमसे कब दूर हुए थे

हर शब दुआ में आए और बेचैन कर गए।


मिट सी गईं है ख्वाहिशें जाने से उनके मेरी

ना लौट कर जो वो आए बेचैन कर गए ।



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