Zuhair abbas
Tragedy
कोई वजह ना दी कोई गिला ना किया
वो इस तरह खामोशी से मुझसे जुदा हुआ।
एक बार ज़रा मुड़कर मुझे देख लिया होता
वो इस क़दर बेरुखी से मुझसे जुदा हुआ।
थे अश्क आंखों में उसकी मगर खामोश रहा वो
झुंटी हसी लिए लबों पर वो कुछ ऐसे जुदा हुआ!
वो मोहब्बत है...
जुदाई
इंतज़ार
ज़िन्दगी रुकत...
फेक लव
तेरा इंतज़ार
ये ज़िंदगी है
बेवफा मोहब्बत
दर्द ए दिल
इश्क इबादत
खोलों नेत्र तुम अपना ,कहाँ छुपे भगवान युद्ध तीसरा मच रहा,करो कुछ समाधान। खोलों नेत्र तुम अपना ,कहाँ छुपे भगवान युद्ध तीसरा मच रहा,करो कुछ समाधान।
गुमनाम लोगों ने इस युद्ध में अपनी जान गंवा दी गुमनाम लोगों ने इस युद्ध में अपनी जान गंवा दी
लेकिन बेरोजगारी का टैक्स हटाओगे कैसे। लेकिन बेरोजगारी का टैक्स हटाओगे कैसे।
फंस गए एक अजीब परिस्थिति में ना कल का ठिकाना न परसो का। फंस गए एक अजीब परिस्थिति में ना कल का ठिकाना न परसो का।
एक ढिबरी जो रह रह के बुझ जाया करती थी एक ढिबरी जो रह रह के बुझ जाया करती थी
दौलत की भूख ने विशू जिंदा जला दिए। तेरे रिवाज रस्म से अनजान बहुत हूं। दौलत की भूख ने विशू जिंदा जला दिए। तेरे रिवाज रस्म से अनजान बहुत हूं।
माँ बोलो ना इनको मैं तेरा बच्चा हूँ मैं भी आम बच्चो के जैसा हूँ. माँ बोलो ना इनको मैं तेरा बच्चा हूँ मैं भी आम बच्चो के जैसा हूँ.
दोस्त (दूसरे पंछी) तो नजर आते हैं पर उनके करीब जा नहीं सकता। दोस्त (दूसरे पंछी) तो नजर आते हैं पर उनके करीब जा नहीं सकता।
फिर माफी भी मांगते हो अनगिनत घाव देकर फिर माफी भी मांगते हो अनगिनत घाव देकर
जब इजहारे मोहब्बत की सोचा, वो मुझे छोड़कर जा चुकी थी। जब इजहारे मोहब्बत की सोचा, वो मुझे छोड़कर जा चुकी थी।
बाहर तो देखता हूं ,पर जा नहीं सकता। बाहर तो देखता हूं ,पर जा नहीं सकता।
शहीदों के ढेर पे जश्न मनाता है उजड़ती हैं बस्तियाँ इसको मज़ा आता है। शहीदों के ढेर पे जश्न मनाता है उजड़ती हैं बस्तियाँ इसको मज़ा आता है।
जिस को मन मंदिर में मूरत समझ कर स्थापित किया हम ने, जिस को मन मंदिर में मूरत समझ कर स्थापित किया हम ने,
हम ना जाने कब उनसे प्यार कर बैठे दिल ही दिल में जाने कब इसरार कर बैठे। हम ना जाने कब उनसे प्यार कर बैठे दिल ही दिल में जाने कब इसरार कर बैठे।
ताक़त की नुमाइश का ऐसा क्या तरीका, ताक़त की नुमाइश का ऐसा क्या तरीका,
हम ने तो उसे दिल में जगह भी दे दी, फिर भी हम से रूठ कर क्यूं चली जाती है? हम ने तो उसे दिल में जगह भी दे दी, फिर भी हम से रूठ कर क्यूं चली जाती है?
करूं कोशिश जितनी पास आने की तेरी बेरुखी तुझे मुझसे दूर ले जा रही हैं। करूं कोशिश जितनी पास आने की तेरी बेरुखी तुझे मुझसे दूर ले जा रही हैं।
ऐसे में कोई कैसे विश्वास करे, सब मतलब के यार जो ठहरे। ऐसे में कोई कैसे विश्वास करे, सब मतलब के यार जो ठहरे।
जिसे वो रब का इशारा समझ रही थी वो तो एक मजाक निकला। जिसे वो रब का इशारा समझ रही थी वो तो एक मजाक निकला।
इन्तजार होता आने वाले पत्रों का, जिसे पढ़कर खुश होता मन । इन्तजार होता आने वाले पत्रों का, जिसे पढ़कर खुश होता मन ।