Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

Zuhair abbas

Abstract

4.5  

Zuhair abbas

Abstract

ज़िन्दगी रुकती नहीं

ज़िन्दगी रुकती नहीं

1 min
219


अब इतना भी क्या अफसोस तेरे चले जाने का

माना तकलीफ में हैं ,सांसें ठहरी सी हैं

मगर इस क़दर बेरुखी पर तेरी खुदको खत्म तो नहीं कर सकते...


तेरे ना निभाए जाने वाले वादों ने बेशक तोड़ सा दिया है

मगर दर्द में रहकर भी क्या मस्कुरा नहीं सकते।


तेरे बिना जीना ज़रा मुश्किल तो होगा

लकिन तेरी यादों के अंधेरों मे घुटकर मर तो नहीं सकते ।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract