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Dhan Pati Singh Kushwaha

Tragedy


4.7  

Dhan Pati Singh Kushwaha

Tragedy


ईमानदार बेईमान

ईमानदार बेईमान

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सब कमियां ढूंढते हैं दूसरों में,

खुद की कमियां सारी बिसारी।

बेईमानी का न छोड़ें कोई मौका,

पर ढूंढते फिरते हैं ईमानदारी।


दो तरह के ही ईमानदार जगत में,

पहला वह जिसको मिला न अवसर।

दूजा वह जो भयभीत हो गया हो,

पकड़े जाने या नैतिकता से डरकर।

घोटालों में है जिन्हें प्राप्त महारत,

हथेली पर इज्ज़त लिए फिरते सारी।

बेईमानी का न छोड़ें कोई मौका,

पर ढूंढते फिरते हैं ईमानदारी।


बेईमानों के विविध समूह बना करके,

करते हैं विधिवत बेईमानी बारी-बारी।

बेईमानी के धंधों के भी अपने उसूल हैं,

जिन्हें निभाने में रहती पूरी ईमानदारी।

घनिष्ठ मित्रता निभाते हैं मिल-जुलकर,

बड़ी अजीब सी है इ‌नकी कारगुज़ारी।

बेईमानी का न छोड़ें कोई मौका,

पर ढूंढते फिरते हैं ईमानदारी।


जानकारी करके सब ही पक्की ,

हम खुद को बनाएं शक्तिशाली।

दे सके न धोखा हमें भ्रमित कर,

निज ज्ञान से करें अपनी रखवाली।

धैर्य-विवेक से हम करें नियोजन,

और बाधाओं से जूझने की तैयारी।

बेईमानों को हम सबको सिखा दें,

सर्वत्र तब मिल पाएगी ईमानदारी।


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