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अमित प्रेमशंकर

Tragedy Action Others

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अमित प्रेमशंकर

Tragedy Action Others

हे शरणागत वत्सल

हे शरणागत वत्सल

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रख लो स्वामी शरण में अपने

बन कर अनुचर आया हूँ

हे शरणागत वत्सल

तेरी पद रज लेने आया हूंँ।।


हूँ तो मैं एक राक्षस कुल का

उसमें भी शत्रु का भाई

हांँ हाँ रघुवर दुष्ट निशाचर

मैं विभीषण, रावण का भाई।

मैं विश्वास का पात्र नहीं पर

आस लगा कर आया हूंँ

हे शरणागत वत्सल

तेरी पद रज लेने आया हूँ।।


हर लो मेरे प्राण प्रभु

गर हो मुझपर संदेह तनिक

जीवन भर भक्ति की तेरी

ले लो मेरा देह क्षणिक।

अनल,अनिल भीम,संपाति संग

निश्छल मन से आया हूंँ

हे शरणागत वत्सल

तेरी पद रज लेने आया हूंँ।।


भरी सभा में रावण ने

अपमानित कर उपहास किया

मार के ठोकर देश निकाला

मुझ पर बड़ा ही त्रास किया

हे जगत के स्वामी 

तेरा दास मैं बनके आया हूँ

हे शरणागत वत्सल

तेरी पद रज लेने आया हूँ।। 


बात जरा इतनी थी बस

उसको समझाना चाहा था

धर्म,नीति का पाठ पढ़ा 

लंका को बचाना चाहा था।

पर माना ना दंभी वह

यह बात बताने आया हूँ 

हे शरणागत वत्सल

तेरी पद रज लेने आया हूँ।।


सबने उसको खूब समझाया 

कि लौटा दो सीता को 

प्रभु शरण में जाकर दे दो

उनके कंत वनिता को।

हठिया वो हठ छोड़ा ना

मैं क्षमा मांगने आया हूँ

हे शरणागत वत्सल

तेरी पद रज लेने आया हूँ।।


एक पापी के खातिर 

सारी लंका को उजाड़ो ना

गोद किसी की, मांग किसी का

स्वामी मेरे उजाड़ो ना।

हे दाता, मेरे रघुवर 

मैं याचक बनकर आया हूँ

हे शरणागत वत्सल

तेरी पद रज लेने आया हूँ।।


तब स्वामी रघुवर बोले

तुम सुनो सुनो मेरे लंकेश

मारा जाएगा बस रावण 

बचा रहेगा तेरा देश।

किंतु युद्ध की आस लिए 

इस रण में जो भी आएगा

विवश राम और वानर सेना

उसपर शस्त्र उठाएगा।


लंका की भोली भाली

जनता से कोई बैर नहीं 

जिसने हर ली जगदंबा को

उसकी अब है खैर नहीं।

उसका अंत सुनिश्चित है

तुझे लंका पति बनाता हूँ

राजतिलक कर अभी तुझे

मैं राजमुकुट पहनाता हूँ।


हुए आज से मित्र मेरे तुम 

हे भावी लंका नरेश 

स्वर्ण जड़ित यह नगरी तेरी

तेरा ही है प्यारा देश 

मुझे चाहिए सीता बस एक 

और लौट मैं जाऊंगा 

यदि मान ले रावण तो

अब भी ना शस्त्र उठाऊंगा।


यदि मान ले रावण तो

अब भी ना शस्त्र उठाऊंगा।



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