STORYMIRROR

अमित प्रेमशंकर

Tragedy Classics Inspirational

4  

अमित प्रेमशंकर

Tragedy Classics Inspirational

रखना लाज इस राखी का।

रखना लाज इस राखी का।

1 min
60

रखना लाज इस राखी का

मेरे प्यारे भैया तू
बहना को न भूल जाना
रखना लाज इस राखी का
तू मुरलीधर बन जाना।

 चीखती रह जाती है द्रौपदी
अपने घर में भैया
खींचता रहता दुष्ट दुःशासन
आंँचल मेरे भैया
बन के कृष्ण कन्हैया मेरे
चीर की लाज बचाना
रखना लाज ये राखी का
तू मुरलीधर बन जाना ।।

 है ये बंधन नेह स्नेह का
ना कोई शक भैया
मांँगू तुझसे एक वचन
है मेरा हक ये भैया
बन के भाई हर बहना का
जग की लाज बचाना
रखना लाज इस राखी का
तू मुरलीधर बन जाना ।।

 कविः- अमित प्रेमशंकर


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy