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JAYANTA TOPADAR

Drama Tragedy Crime

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JAYANTA TOPADAR

Drama Tragedy Crime

हाय रे, आदमी !!!

हाय रे, आदमी !!!

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कितना स्वार्थी बन गया है आज आदमी !!!
ऐसा लगता है मानो चलता-फिरता 
यंत्र बन गया है आज आदमी...!

बस अपनी फ़िक्र, अपना परिवार,
अपनी चाहतें, अपना आनंद-विहार,
फिर दुनिया जाए भाड़ में...!
दूसरे बेचारे मुफलिस चाहे आकंठ डूबा रहे
अपनी रोज़मर्रा की जद्दोजहद में...!!
इससे उसका कोई सरोकार नहीं...
हाय, कितना स्वार्थी बन चुका है आज आदमी !!!


चाहे कोई लाचार-मजबूर बदहवास होकर
ज़िन्दगी से ही हार मान जाए,
चाहे कोई अपनी फूटी किस्मत का रोना  रोए,
अपनी दौलत-ओ-शोहरत के रंगमहल में
दिखता है निर्दयी हरेक रईस आदमी...!
ऐसा ख़ुदग़र्ज़ बन गया है आज आदमी...

अक्सर दूसरों को फोकट की सलाह देने में माहिर 
विभिन्न प्रकार के मुखौटे बदल-बदल कर
अपनी औकात दिखाने से 
कभी बाज़ नहीं आता है
इस युग का हरेक स्वार्थी आदमी...!
बेशक़ अपने गुरूर में अपनी इंसानियत भी
बेच चुका है आज आदमी !

बस 'मेरा ! मेरा !' चिल्लाता हुआ 
हर पल तिल-तिल मरता हुआ...
शायद अपनी भावनाओं को
श्मशान-घाट या कब्रिस्तान में 
पीछे छोड़कर आ चुका है आज आदमी...

हाय रे, आदमी !!!


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