सफ़र ज़ारी रहेगा...
सफ़र ज़ारी रहेगा...
मंज़िलें और भी हैं...
ये तो मेरे सफ़र का आगाज़ है,
अंजाम नहीं !
मेरे ठिकाने और भी हैं,
यही आखिरी पड़ाव नहीं...!
मुझे आगे चलते जाना है...
अपनी पहचान बनानी है...
अपनी शर्तों पे
ज़िन्दगी जीने की तमन्ना है...
दूसरों की राय से
अपनी सोच न बदलकर
हर एक मौक़े को
अपनी सुधार का ज़रिया बनाना है...
अपनी जगह मुकम्मल करनी है।
अभी तो बहुत दूर चलना है...
