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Dr Hoshiar Singh Yadav Writer

Drama Classics Children

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Dr Hoshiar Singh Yadav Writer

Drama Classics Children

गर्भपात

गर्भपात

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मार रहे हैं कोख में, भ्रूणहत्या है पाप,

लड़कों को पसंद करे, आए कब धाप।

बुराई करते जग में, जिसका नहीं नाप,

एक दिन वो आएगा, लग जायेगा श्राप।।


लड़की लड़का भेद हो, कैसा युग आया,

लड़की को मारते, लड़का मन में लुभाया।

पता नहीं कब रुकेगा, भेदभाव है अन्याय,

पर लड़की को देखिये, मन सभी लुभाया।।


नजर उठाकर देख लो, लड़की करती नाम,

मात पिता सेवा करे, घर को बना दे धाम।

कुछ लड़के ऐसे हुए, कर देते घर बदनाम,

दुख देते हर वक्त ही, गाली दे सुबह शाम।।


फर्क मिटेगा जब कभी,समझेंगे एक समान,

मिटे जाये अंधकार भी,मन से बुरा न मान।

लड़की घर आंगन की, होती है एक शान,

सोच समझकर काम ले, बनो नहीं अज्ञान।।


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