एलियान
एलियान
हाथ का बटन दबाकर वह बोला
आखों से रोशनी पसारकर बोला
अनजान देश की भाषा में बोला।
एलियान ही हूँ, परग्रह से आया
आया हुआ शकट बंदस्त था नहीं
अस्पष्ट ध्वनियाँ निकल रही थीरे
अति हर्ष से फिर समादर से पूछा
हरित भूमि में उतरने की बात क्या
सस्य विटपों की समृद्धि देखो तुम
आसमान को बढी टहनियाँ देखो।
गगन चुंबी उच्च टवर को देखकर
अवनीतल घूमने का लक्ष्य कह दो।
आगमन की लगन कैसे हुआ यहाँ
दूभर दुरुस्त संकटमय है जिंदगी ?
अन्य ग्रहों का स्वजीवन खतम कर
देखने आया क्या मर्त्य नित्य क्षरण
नयन दल से तीव्र रश्मि निकालकर
बटन दबाकर फिर एलियान ने कहा
भूगोल शास्त्रियो को यहाँ से निडर
अन्य ग्रहो की ओर ले जाने आया
सारे समस्त छली,कपटी, दुश्मन हो
आओ,अतिवेग से मेरे शकट में बैठें
ले जा रहा हूँ, समय बहुधा नहीं है
सभी नीच असत्यवान, दंभी भी चलें।
