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ANANDAKRISHNAN EDACHERI

Others

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ANANDAKRISHNAN EDACHERI

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मधुमास

मधुमास

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अंबरतल में कुहरा ओझल

कम पड़ने लग जाती सर्दी

निर्मल स्वच्छ बना है गगन

वैभव से ऋतुराज समागम


नदी सरोवर तालाबों की

भौतिक छवि मनमोहक है

पीपल बरगद नाना तरु में

नव नव कोंपल फूट पडी ॥


महुए की मनमोहक सुगंधि

वन वन का दिल लूट रही है

प्रिय पराग की मृदुल खुशी से

शहद समाहृत मधुमक्खी दल ।


नयन नीर को दूर बहाकर

सारे मानव वस्त्र बदलकर

अपूर्व शोभा निरख प्रकृति की

आनंदोत्सव लाया घर में ॥



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