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Kanchan Prabha

Drama Fantasy Inspirational

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Kanchan Prabha

Drama Fantasy Inspirational

एक थी राजकुमारी

एक थी राजकुमारी

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एक थी सुन्दर राजकुमारी 

लगती सब जोवों को प्यारी।


कभी तोता को चना खिलाती

 कभी बिल्ली को ढूध पिलाती।


भोली सुरत बात निराली

सबके मन को मोहने वाली।


 हंसा मोर भी साथी उसका 

 हर प्राणी था सारथी उसका।


गाईया को गहना सजवा दे

मोरनी को भी हार पहनावे।


कैसा अनोखा मन था उसका

सुन्दर अभिनव तन था उसका।


जानवरों के लिये जान था हाजिर

उस कार्य में निपुण और माहिर।


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