दोस्ती
दोस्ती
यार तो हमें बहुत मिले,
जिनसे हम रोज मिलते थे,
पर उस यार की बात ही अलग थी,
जिससे मेरे दिल के तार जुड़े थे !
उसके आसुंओं का स्रोत,
भले उसकी आँखों से होता था,
मगर उनके गिरने पर,
दर्द मुझे भी होता था!
याद है मुझे आज भी वो पौधा,
जिसको हमारी दोस्ती ने सींचा था!
वो पौधा तो अब पेड़ बन गया
न जाने मेरे वो यार किधर गया !!
इन हाथों ने कही हाथ आगे बढ़ाया,
मगर वो साथ न मिल पाया ,
जिसकी कामना करके,
दिल मेरा यूहीं मुस्कुराया !
आशा है अब भी मुझको,
उम्मीद का सूरज...
फिर से खिलेगा,
अकेलेपन के इस तिमिर को,
दोस्ती की हर हद तक रोशन कर देगा !
