STORYMIRROR

Indu Tiwarii

Horror

4  

Indu Tiwarii

Horror

डरावना

डरावना

1 min
327

सहज तो तब भी नहीं था 

जब तूने अपने मन पसंद साथी के 

साथ घर छोड़कर जाना चुना था 

इज्जत दांव पर लगी थी हमारी..


अच्छा मुझे तब भी नहीं लगा था 

जब तूने अपनी मर्जी से 

बिन शादी के उसके साथ रहना चुना था 

अधिकार और आजादी के नाम पर..


जी हम तब भी नहीं पा रहे थे 

जब सुनते थे पीटता है तुझको 

रोज होती है क्लेश तेरी इस जिद्द पर 

कि मुझे अपना नाम और पहचान दो..


लेकिन बहुत ही डरावना था वो दिन 

जब हम ये जाने कि उस दरिन्दे ने 

पैंतीस टुकड़े किये मेरे दिल के टुकड़े के 

बहुत ही डरावना था सुनना, जानना,

देखना और इस दुःख को झेलना..!!



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Horror