दान का समझिए अर्थ
दान का समझिए अर्थ
दान की महिमा जानिए
दान का समझिए अर्थ ,
पात्र को दान ही सफल है
कुपात्र को दान व्यर्थ।
बांट कर थैला अन्न का
सेल्फियां खींची भरपूर
किया ज़लील गरीब को
किया बेज़्ज़त इक मजबूर
क्या कोई उसका दोष था
या उसका था कोई कसूर
दिखावे की तेरी दरियादिली
जिसमें भरा हुआ है गुरूर
नाटक है झूठी शान की खातिर
ऐसा दान निरर्थ
दान की महिमा जानिए
दान का समझिए अर्थ।
दान करो तो प्रदर्शन मत करो
वरन अपनी दौलत घर पर ही रखो
पीट ढिंढोरा दान का
किसी गरीब दिल दुखी मत करो
आह लगेगी एक मज़लूम की
मत करो ऐसा अनर्थ
दान की महिमा जानिए
दान का समझिए अर्थ।
दान करते ऐसी खता न हो
एक हाथ से किये दान का
दूसरे हाथ को पता न हो
दान सीखिए कर्ण से
जिन दान कियो बिन अहंकार
कवच कुण्डल तक दान किये
भूल कर प्रतिकार।
दान तो है ईश वंदना
दानी होता इक सन्त,
दान मन की मैल धोये
करे लोभ का अंत।
दिखावे का दान छोड़ दो
जिसमे भरा पड़ा स्वार्थ
दान की महिमा जानिए
दान का समझिए अर्थ।
