STORYMIRROR

Chhabiram YADAV

Drama

3  

Chhabiram YADAV

Drama

बसन्त ऋतु

बसन्त ऋतु

1 min
309

चहकते महकते बसन्त आ गया

आज देखो धरा पर गगन भा गया

देख खेतो में झूमती गेहूं की बालिया

आज भौरों का दिल फूलों पर छा गया


पीली चुनर ओढ़े धरा जब खिली

लगती है लगन में बहके मनचली

आम के कुञ्ज से देखो मिठास

सुबह होते ही जैसे हवा चुलबुली


देख बसंत का अदभुत नजारा 

लगे सबको बहुत प्यारा प्यारा 

आज अमराई देख, मस्त जीव जन्तु

मयूर तान सुन कर लगा बहुत प्यारा।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama