STORYMIRROR

Chhabiram YADAV

Inspirational Others

3  

Chhabiram YADAV

Inspirational Others

उम्मीद

उम्मीद

1 min
292

उम्मीदों का सूरज निकलने वाला है

मन का भरम भी अब टूटने वाला है

कोसता क्यूँ मन को चल कदम बढ़ा

तम को भगाने सवेरा आने वाला है


अब उम्मीदों का आस न छोड़ो

निज मन का विश्वास न तोड़ो

मुठ्ठी में कैद है मंजिल तुम्हारी

चलते रहो पर राह न मोड़ो


निज उम्मीदों के पंख पसारे 

अपने जीवन में तुम प्यारे

छू जाना तुम आसमान को

बिना कभी भी हिम्मत हारे।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational