STORYMIRROR

Anita Sharma

Romance Children

4  

Anita Sharma

Romance Children

बंद अलमारी

बंद अलमारी

1 min
243

बंद अलमारी में ख्वाब छुपा रखे थे। 

न जाने कितनी एहसास, कितने अरमान छुपा रखे थे। 


जब मन होता है जा कर झांक लेती थी। 

उन अधूरे रंगीन सपनों की कसक महसूस कर लेती थी। 


एक दिन वो बंद अलमारी सबके सामने खुल गई। 

मेरे ख्वाब अब मेरे अपनों के भी हो गये। 


छू लिया गगन तब, नापी हर ऊँचाई थी। 

जब मेरे बच्चों ने ही मुझे उड़ना सिखाया था। 


मेरा हमदम भी पीछे न रहा

मेरे हर ख्वाब को उन्होंने भी पूरे सिद्दत से जिया। 


नजर न लग जाए कहीं मेरी ही इसलिये

 बंद कर आँखें नजर उतार लेती हूँ।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance