STORYMIRROR

Kishan Negi

Drama Romance Fantasy

4  

Kishan Negi

Drama Romance Fantasy

बहुत शौक था मुझे भी

बहुत शौक था मुझे भी

1 min
316


बहुत शौक था मुझे भी औरों की तरह

फिर इक दिन वह गलती भी कर बैठा

शाम का वक़्त और दरिया किनारा था

जिसकी उम्मीद ना थी वह गुनाह कर बैठा


देखा था उसने तिरछी निगाहों से मुझे 

इस अदा को अपना नसीब समझ बैठा

मालूम ना था क्या होगा अंजाम उसका

अजनबी को दिल के करीब समझ बैठा


आंखों ही आंखों में बातें भी होने लगी

इसे पहले प्यार का इज़हार समझ बैठा

मुस्कुराकर फिर उसने पलकें जो गिराई

इस ज़िन्दगी से ख़ुद को फरार समझ बैठा


इसे बेवकूफी कहूँ या मेरा दीवानापन

खुद को संभाला मगर दिल पिघल बैठा

देखते ही देखते हवा में जुल्फ लहराई

जैसे आसमां से कोई बादल फिसल बैठा


चेहरे से हटाकर नकाब फेंक दिया उसने

चांद क्या देखा चांदनी रात समझ बैठा

रात के अंधेरे में जाने कहाँ गुम हो गई

शतरंज के खेल में इसे मात समझ बैठा



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama