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निखिल कुमार अंजान

Romance

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निखिल कुमार अंजान

Romance

बहुत दिन हो गए

बहुत दिन हो गए

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बहुत दिन हो गए मोहब्बत पर नहीं लिखा

आँखों की फलक पर कोई सपना नहीं सजा।


क्या करे महबूब ही आजकल थोड़ा व्यस्त है

तो दिल ने भी कुछ दिन की छुट्टी की मंजूर है।


आज फिर दिल के अरमान जाग गए हैं

बजा के फोन की घंटी छेड़ के वो भाग गए हैं।


उनके इस करतब से चेहरे पर मुस्कान है छाई

दिल ने भी मलकर आँखें ली है अँगड़ाई।


मचलकर उछल रहा है दिल इस कदर कि

नयनों के सामने नजर आ रही है तेरी परछाई।


बेशक दूर थी काम के चलते थोड़ी मजबूर थी

लेकिन मेरे इश्क में डूबी तू भी भरपूर थी।


तेरी मेरी इस जँहा में अनोखी ही कहानी है

ये अंजान के प्रेम की अंजान दीवानी है।।


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