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निखिल कुमार अंजान

Abstract

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निखिल कुमार अंजान

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नए नए हो क़ायदे मे रहा करो....

नए नए हो क़ायदे मे रहा करो....

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तमीज और तहज़ीब के दायरे मे रहा करो

अभी तुम नए नए हो कायदे मे रहा करो 


बड़ी दूर तलक इंतजार मे खड़े हैं लोग

उस खुदा की रहमत है तुम पे कि भीड़

मे भी आवाज देके तुम्हें बुलाते हैं लोग


वैसे कहने को तो सब ही हकीम है यहाँ

हुनर तो वो है जो नब्ज देख मर्ज जान ले

दवा भी दे मर्ज से निजात दिला भी दे

मेरी नजर मे तो सिर्फ काबिल है वो

बाकि जो बचे हैं डिग्रियाँ अपनी जला दे वो.... 




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