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निखिल कुमार अंजान

Inspirational


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निखिल कुमार अंजान

Inspirational


जीवन रण.....

जीवन रण.....

1 min 321 1 min 321

दुख को देख क्यों 

व्यर्थ दुखी है होता

जो चला गया त्याग तुझे 

वो भला क्या तेरा होता

मार्ग कठिन है कड़ी तपन है

किंचित भी व्यथित न होना

हृदय मे बंद पड़ी जो साध (अभिलाषा, इच्छा)

लक्ष्य बना निरंतर उस ओर ताक

कल कल कर दुर्गम पथ बहता जल

तू भी बिना रुके बिना डिगे निरंतर चल

सुख मे जब तू सुख का है साथी 

तो दुख का भी स्वयं तू ही है भागी

सुख दुख सब तेरे कर्मों का है फल

अभी देर नही है ज्यादा अबेर नही है 

समय रहते अब खुद ही तू संभल

काल चक्र घूम रहा न हो शोकाकुल

हे वीर खड़ा हो जीवन रण है

योद्धा की भांति तू चल...... 


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