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Roshan Baluni

Inspirational


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Roshan Baluni

Inspirational


"माँ"

"माँ"

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माँ समान दूजा नही,

यह वेदों की बात।

अनुष्ठान सम मात है,

नमन करो हे तात।।


माँ मंत्रों का जाप है,

दूर होत सब पाप।

माँ ही पूजा-त्याग-तप,

हर लीजो संताप।।


माँ ममता-रसधार है,

प्रेम पाइये रोज।

जन्नत उसके पैर मैं,

 इधर-उधर मत खोज।।


माँ सृष्टि समरुप है, 

 उसकी दया अपार।

सब रस की तू खान है,

 शांत-भक्ति-शृंगार।।


ओढूँ आँचल-छाँव को,

मिले हर्ष अपार।

तव बिन जीवन सून है,

नीरस यह संसार।।


माँ काशी-कैलास है,

भटकत अटत न जाय।

मैले मन को छाँडि दे,

माँ का बनें सहाय।।


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