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Shubhrakanta Mishra

Romance Others

4.4  

Shubhrakanta Mishra

Romance Others

बेपनाह प्यार

बेपनाह प्यार

1 min
340


तू इंकार करे फिर भी मैं प्यार करूँ

हो मुखालिफ कोई फिर भी मैं ऐतबार करूँ 

जमाने भर से क्या रिश्ता है मेरा 

जमाने भर की ख़ुशियाँ तुझ मे पा लूँ


कोई खता हो मन मैं उसको तहलील करूँ

तू मेरी जान है यह कुबूल करूँ

बेख़ौफ़ हो के मुझे प्यार कर

तेरी मोहब्बत की हिफाज़त मैं करूँ


इश्क़ किया नहीं हो गया था तुझ से

शायर हूँ नहीं बन गया था तुझ पे

ऐसा क्यों हुआ कैसे हुआ पता नहीं

बस कहानी तुझ से शुरू और ख़तम करूँ


रात में करवटें लेते हुए तेरी याद आती हे

दिन में धूप से लपेटते हुए तेरी याद आती है

यादें बहुत दिल को बेचैन करती है साहेब

ये ख़ुदा तू बता इन यादों का मैं क्या करूँ....



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