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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

Romance

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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

Romance

"बादल और पर्वत "

"बादल और पर्वत "

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बादल घिर आये पर्वतों को चूमने लगे !

अपनी बाहों में उसको भरने लगे !


मिलन की प्यास वर्षों से लगी थी !

बस इंतजार करके यूँ आँखें तरसने लगी थी !


गर्म हवाओं के झोंके हमें

एक जगह टिकने नहीं देती थी !


हम इंतजार करते रहते थे 

पर हमें मिलने नहीं देती थी !


आज हम पर्वतों से टकरा गए !

वर्षा की बूंदों में व्यथा सारे मिट गए !


हम मिले तो प्रकृति सारी खिल गयी !

अपने लोगों के मिलन से खुशियां सारी मिल गयीं !


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