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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

Classics

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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

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"माँ दुर्गा "

"माँ दुर्गा "

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आदरणीय "StoryMirror " मंच को नमन और आज की स्वरचित मौलिक कविता " माँ दुर्गा "को सादर समर्पित !

सन्दर्भ :-यह कविता दिखाती है कि ईश्वर से जुड़ने के लिए ज्ञान या आडंबर की नहीं, बल्कि सच्चे हृदय और अटूट विश्वास की आवश्यकता होती है। यह माँ दुर्गा की सर्वव्यापकता, करुणा और भक्त वत्सलता को बहुत ही सुंदर ढंग से व्यक्त करती है !
दिनाँक :-२२ मार्च २०२६ 
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माँ दुर्गा” 
डॉ लक्ष्मण झा परिमल
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जगत की जननी तुम ही हो 
तुम्हें दुर्गा सभी कहते 
तुम्हारे नाम ले कर के 
तुम्हें प्रणाम सब करते 

नहीं  कोई मंत्र ही जानू
करूँ मैं किस विधि पूजा 
मुझे आती नहीं  मुद्रा 
नहीं कोई साधना दूजा 

मैं इतना जनता हूँ बस 
तुम्हारे संग चलना है 
हमारे  कष्ट को हरकर 
सदा ही दिल में रहना है 

नहीं कुछ और मैं चाहूँ 
भला क्या मैं तुम्हें दूँगा
तुम्हीं जननी जगत के हो 
तुम्हीं से प्यार मैं लूँगा 

हे करुणासिंधु माँ दुर्गे
सदा कल्याण तुम करना 
तुम्हारे पुत्र हैं हम तो 
मेरा कल्याण तुम करना 
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डॉ लक्ष्मण झा परिमल 
दुमका ,झारखंड 
22 मार्च 2026 


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