"कनियाक प्रतीक्षा "
"कनियाक प्रतीक्षा "
आदरणीय "StoryMirror "मंच को सादर नमन और स्वरचित मैथिली कविता आप लोगों को समर्पित कर रहा हूँ !
संदर्भ :-- यह कविता एक पत्नी की अपने पति के प्रति अदम्य प्रतीक्षा, अथाह प्रेम और विरह की मार्मिक वेदना का चित्रण करती है। नायिका शारीरिक और मानसिक रूप से थक चुकी है, उसका यौवन विरह में क्षीण हो रहा है, लेकिन उसकी आशा कभी नहीं मरती। कौए की आवाज़ के माध्यम से दिखाया गया शुभ शगुन उसकी बुझती उम्मीद को फिर से प्रज्वलित कर देता है। कविता में नायिका की एकाग्रता, उसकी निष्ठा और प्रियतम के लौटने की उसकी गहरी आस्था को दर्शाया गया है। "मन मे आभास भेल" वाली पंक्तियाँ उसकी भावनात्मक यात्रा का केंद्रीय बिंदु हैं, जो हर मोड़ पर उसकी उम्मीद को पुनर्जीवित करती हैं।
दिनाँक :---1 अप्रैल 2026
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