"अनमोल प्रेरणा "
"अनमोल प्रेरणा "
आदरणीय "StoryMirror "मंच को आज की स्वरचित मौलिक कविता अभिनंदन के साथ समर्पित !
संदर्भ :-यह कविता एक गहरी श्रद्धा, प्रेम और अटूट समर्पण का भाव लिए हुए है। इसमें किसी प्रिय या पूज्य व्यक्ति के प्रति अपनी अनमोल भावनाओं को व्यक्त किया गया है , जिसे हम अपनी प्रेरणा का स्रोत मानते हैं ।
दिनाँक :-23 फरवरी 2026
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”अनमोल प्रेरणा”
नहीं कुछ चाहिए मुझको
मुझे तेरा प्यार पाना है
नहीं कोई लालसा तुझसे
तुझे दिल में बसाना है
अगर कोई चूक होती हो
नज़रअंदाज़ तुम करना
मेरी नदानियों को भी
दिलों से दूर कर देना
तुम्हारे अनुभवों से ही
सदा प्रेरित मैं रहता हूँ
तुम्हारे दिव्य ज्योति से
आलोकित होता रहता हूँ !!
डॉ लक्ष्मण झा परिमल
दुमका
