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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

Inspirational

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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

Inspirational

"कृष्ण की होली "

"कृष्ण की होली "

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आदरणीय “StoryMirror” मंच को प्रणाम करता हूँ और आज की स्वरचित मौलिक रचना सादर समर्पित करता हूँ !

संदर्भ :---यह ईश्वर और आत्मा के मिलन, भक्ति के माध्यम से एकाकार होने और सभी प्रकार के भेदों को मिटाकर प्रेम में लीन होने के दर्शन को प्रस्तुत करता है।

दिनाँक:--04 मार्च 2026

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“कृष्ण की होली”

डॉ लक्ष्मण झा परिमल

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उड़ेलो रंग मत कान्हा मैं उससे भींग जाऊँगी!

तुम्हारे रंग हैं कितने कहो कैसे हटाऊंगी !!


यही हैं रंग जीवन के सभी रंगों को डालूँगा !

इसी रंगों मैं तुमको तुम्हें सुंदर बनाऊँगा !!


चिढ़ाएगी मेरी सखियाँ कहेगी तुम कहाँ खेली !

मुझे भी साथ रखना था क्यूँ खेली कृष्ण से होली !!


सभी के दिल में बसता हूँ सभी के साथ मैं खेलूँ !

अभी तेरे साथ मैं रहकर तुझे सब रंग मैं दे दूँ !!


सभी के रंग अंतर हैं मिलन से ये चमकते हैं !

सजे हैं फूल रंगों से चमन खिलते ही रहते हैं !!


भिंगोलो तन बदन इसमें मिलन के गीत गाओ तुम !

यही अवसर हैं मिलने का विभेदों को मिटाओ तुम !!

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डॉ लक्ष्मण झा परिमल

दुमका

4 मार्च 2026

  

 


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