"कुछ तुम लिखो ,,कुछ हम लिखें "
"कुछ तुम लिखो ,,कुछ हम लिखें "
आदरणीय “StoryMirror ”मंच को एक स्वरचित मौलिक अभिव्यक्ति सादर समर्पित !
संदर्भ :--इस अभिव्यक्ति में जीवन को आगे बढ़ने, बाधाओं के सामने न झुकने और सामूहिक प्रगति की भावना को दर्शाने का प्रयास किया गया है। रचनात्मकता के माध्यम से प्रेम, प्रकाश और सम्मान फैलाने का आह्वान इसमे निहित है !
दिनाँक :--19 फरवरी 2026
“कुछ तुम लिखो,,कुछ हम लिखें”
डॉ लक्ष्मण झा परिमल
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कुछ तुम लिखो
कुछ हम लिखें
बस लेखनी
बनती रहे
दो प्यार का
संदेश तुम
दिव्य रोशनी
जलती रहे
मिलके अब
हम चल पड़ें
कामना यही रहे
रुके नहीं
झुके नहीं
कदम सदा बढ़ता रहे
पर ना भूलें
शिष्टता को
सम्मान हम
सबका करें
ज्ञान के आलोक को
जहन में उतार लें
कुछ तुम लिखो
कुछ हम लिखें
बस लेखनी
बनती रहे !!
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डॉ लक्ष्मण झा परिमल
