"दिल की बातें "
"दिल की बातें "
आदरणीय “StoryMirror ”मंच को अभिनंदन और स्वरचित मौलिक कविता “दिल की बातें” सादर समर्पित !
संदर्भ :-- कविता का मुख्य विषय है 'हृदय की सरलता और सच्चाई'! सच्ची अभिव्यक्ति दिल से निकलती है, वे स्वीकार करते हैं कि पूर्णता तो किसी में नहीं होती, लेकिन सीखने की इच्छा और लोगों का साथ ही उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है !
दिनाँक :--26 02 2026
“दिल की बातें”
डॉ लक्ष्मण झा परिमल
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दिलों की बात करता हूँ , सहज जो बात होती है !
जो कहता हूँ कभी कोई , समझ सब को आती है !!
मेरी हसरत सदा रहती , लिखूँ मैं भी जरा सुंदर !
निकालूँ शब्दों के मोती, जड़े हैं दिल के जो अंदर !!
बहुत ढूंढा बहुत खोजा , नहीं मैं शब्द को पाया !
नहीं था रस कोई उनमें , नहीं अलंकार को पाया !!
जो मेरा दिल कहे उसको ,वही मैं काम करता हूँ !
मेरा अंदाज़ जो है सो , वही इस्तमाल करता हूँ !!
नहीं है पूर्णता मुझमें , विद्यार्थी बनके रहना है !
अभी तो सीखना मुझको, आराधक बनके रहना है !!
मिला है साथ लोगों का , उन्हीं से मुझको पाना है !
उन्हीं के मार्ग पे चलकर, सफलता मुझको लाना है !!
दिलों की बात करता हूँ , सहज जो बात होती है !
जो कहता हूँ कभी कोई , समझ सब को आती है !!
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डॉ लक्ष्मण झा परिमल
दुमका
26 02 2026
