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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

Action

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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

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"मेरी साइकिल"

"मेरी साइकिल"

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"मेरी साइकिल"

डॉ.लक्ष्मण झा 'परिमल

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मेरी संगिनी, मेरी साइकिल

वह आबाध गति से सड़कों पर दौड़ती है,

और बिना कहे ही मेरे हर संकेत को समझ जाती है।

न कोई शिकवा, न कोई शर्त — बस साथ निभाती है।

यह मुझे पंख-सा सुख देती है, हर मोड़ पर मेरा कहा मानती है।

लोभ से परे, ईर्ष्या से मुक्त, मोह के बंधन से आज़ाद —

एक सच्ची साध्वी-सी, मौन साधना में लीन।

मैं जिधर इसे ले चलूँ, यह मुस्कुराकर साथ हो लेती है,

न थकती है, न रुकती है, न कभी सवाल करती है।

ऐसी निष्काम, निश्छल साथी जब जीवन-पथ पर मिल जाए,

तो फिर क्यों न हम इसे दिल से प्यार करें?

क्यों न इसकी घंटी की मधुर खनक को अपना गीत बना लें?

इस साइकिल दिवस, चलो वादा करें —

पैडल मारेंगे, प्रदूषण हरेंगे,

सेहत सँवारेंगे और इस बेवफ़ा दुनिया में

एक वफ़ादार संगिनी का मान बढ़ाएँगे।

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डॉ लक्ष्मण झा "परिमल"



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