"जलवायु सम्मलेन का हिसाब "
"जलवायु सम्मलेन का हिसाब "
आदरणीय "StoryMirror " नमन एक स्वरचित मौलिक व्यंग्यात्मक अभिव्यक्ति सादर समर्पित !विश्लेषण:
कविता बेतहाशा गर्मी के बहाने जलवायु संकट और नेताओं की खोखली बयानबाज़ी पर तीखा व्यंग्य करती है।प्रकृति की त्रासदी दिखाकर यह बताती है कि सम्मेलनों में चिंता जताने वाले असल में AC कमरों में अपनी उपलब्धियाँ गिनाने तक सीमित हैं।
दिनाँक:14 जून 2026
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"जलवायु सम्मेलन का हिसाब"
(व्यंग)
डॉ लक्ष्मण झा 'परिमल'
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धरती तप रही है 47 डिग्री में,
और नेताजी बोले: "चिंता की क्या बात है?
हमारे पास तो 18 डिग्री वाला AC है।"
तालाब सूखे तो सूखे,
हमने भाषणों से बादल भिगो दिए।
नहर का मुँह फटा पड़ा है,
हमने फ़ाइलों में 'जल संरक्षण योजना' लिख दिया।
किसान आसमान ताके,
हम 'क्लाइमेट समिट' में ताकते हैं बुफ़े।
ग्लोबल वार्मिंग पर प्रस्ताव पास हुआ,
पास होते ही सब अपने-अपने जेट से वापस।
कार्बन हम उगलें,
और इल्ज़ाम गाय-भैंस पर डाल दें।
पेड़ कटें तो कटें,
'ग्रीन अवॉर्ड' की ट्रॉफी तो लकड़ी की ही बनेगी।
सबसे बड़ी उपलब्धि ये रही:
कि गर्मी पर चर्चा करने के लिए
हमने हॉल को 16 डिग्री पर ठंडा कर लिया।
बाहर धरती बिलख रही है,
अंदर हम उपलब्धि का केक काट रहे हैं।
मोमबत्ती फूँकते ही बोले:
"देखो, हमने कार्बन घटा दिया!"
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डॉ॰लक्ष्मण झा'परिमल'
दुमका
झारखंड
