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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

Comedy

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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

Comedy

"फेसबुक के सात परमाणु बम " (व्यंगात्मक कविता )

"फेसबुक के सात परमाणु बम " (व्यंगात्मक कविता )

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आदरणीय “StoryMirror ”मंच को नमन और स्वरचित आज की मौलिक कविता सादर समर्पित !

विश्लेषण:
"लाइक" से "एंग्री" तक के सात रिएक्शन आज संवाद नहीं, सीधा प्रहार बन गए हैं कविता इसी डिजिटल बमबारी पर करारा व्यंग्य है। एक 'हाहा' की चोट जब ज्ञान-विज्ञान पर भारी पड़े, तो समझिए कि अब रिश्ते उंगली के झटकों से ही तौले जा रहे हैं।
दिनाँक: 16 जून 2026 
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"फेसबुक के सात परमाणु बम"
(व्यंग्यात्मक कविता)
डॉ. लक्ष्मण झा 'परिमल’
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लाइक, लव, केयर, 
हाहा, वाउ, सैड और एंग्री —
सात ब्रह्मास्त्रों का 
जखीरा मिल गया है।
बच के रहना मेरे हमदम, 
मेरे दोस्त सारे,
गूगल नहीं, 
ज़ुकरबर्ग ने ये सौगात दे गया है!
आपकी पोस्ट को 
पूरा भला कौन पढ़ेगा,
कौन समझेगा 
आपके दर्द भरे अफ़साने को?
बस अब उंगली के 
एक झटके से ही
रिएक्शन का प्रहार 
दिखाएँगे ज़माने को।
ना तर्क, ना संवाद,
ना सहमति की शर्त,
बस इमोजी से निपटे 
हरेक बहस-ए-शर्त।
कोई कुछ भी लिख दे, 
चाहे गलत या सही,
'थैंक यू' ठोक दो, बात खत्म करो वहीं!
ना कोई छोटा, 
ना कोई बड़ा, ना गुरु,
ना शिष्य का इस 
रणक्षेत्र में रिश्ता खड़ा।
'श्रीमान' कहें किसे, 
'आदरणीय' किसे कहें?
फेसबुक पर तो सब 'यार' ही हमें मिले।
भूल-चूक की 
माफ़ी माँगूँ कहाँ,
जब रिएक्शन से ही 
काम बनता यहाँ।
सोच-विचार की 
किसे है ज़रूरत, मेरे यार,
जब सात बमों का 
ज़खीरा पड़ा है तैयार।
कविता, कहानी, ज्ञान 
और विज्ञान की बात,
सब पर भारी एक 
'हाहा' की प्यार भरी लात।
हम भी अब तो 
अपनी अक्ल के ताले जड़े,
सातों परमाणु बमों 
के गोलों के साथ हैं खड़े!!
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डॉ. लक्ष्मण झा 'परिमल’
दुमका
झारखंड  


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