Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra
Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra

Tarun Anand

Abstract Classics Comedy


4.5  

Tarun Anand

Abstract Classics Comedy


लॉक डाउन व्यंजन दोहे [ भाग-2 ]

लॉक डाउन व्यंजन दोहे [ भाग-2 ]

2 mins 957 2 mins 957

1. कोरोना के खतरे को कैसे मै टालूँ,

  आज कल खूब दबा के खा रहा हूँ आलू।

  

2. अब तेरा क्या होगा रे कालिया,

  सरदार ! सुबह शाम खा रहा हूँ दलिया।

  

3. लॉक डाउन मे है फास्ट फूड का टोटा,

  इसलिए घर मे ही खाता हूँ बनाके पराँठा।

  

4. क्या बैठे बैठे हो गए हो कब्जी,

  तो सुबह शाम खाओ दबा के सब्जी।

  

5. लॉक डाउन मे मिल नहीं रहा व्हिस्की और रम,

  बस घर बैठे खाते रहो टेस्टी आलू दम।


6. बाहर से आने पर हमेशा लिया करो शावर,

  और हमेशा सुबह मे खाया करो चावल।

 

7. चला गया छोड़ कर बजाने वाला डफली,

  नॉन वेज मे हमेशा खाया करो मछली।

 

8. बैठे बैठे कहते है हर घर के जीजा,

  अब कभी न मँगवाना बाहर से पिज्जा।

  

9. अगर खराब हो गया हो बैठे बैठे हाजमा,

  तो रोज बना के खाओ गरमा गरम राजमा।

  

10. आतंकवाद प्रभावित क्षेत्र है जम्मू का रजौरी,

   नाश्ते मे हमेशा खाओ खस्ता कचौरी।

 

11. आँधी तूफान मे तिनके की तरह उड़ गए गाछ,

   रहो हमेशा चुस्त तंदुरुस्त पी के छाछ।

 

12. क्या आपका दिमाग नहीं रहता है सही,

   तो रोज भोजन मे खाया करो छाली वाला दही।

 

13. कड़वे शब्द दे जाते है बड़ा घाव,

   इसलिए मीठा बोलो खाके बड़ा पाव।

 

14. लॉक डाउन मे कभी बचे हो पुलिस की लाठी से,

   मेहमानों का स्वागत करो हमेशा दाल बाटी से।


15. अगर आवारागर्दी की भूत है तुम पर चढ़ी,

   तो घर मे रहो और खाओ चावल कढ़ी।

 

16. लॉक डाउन मे आवारा लौंडे नाच रहे बन के घिरनी,

   क्या कभी खाया है बना के स्वादिष्ट फिरनी।


17. खाके मालपूआ रोज करो भगवान की पूजा,

   जो निकले बाहर तो मार डंडा पिछवाड़ा देंगे सूजा।

 

18. अभी बाकी है करनी गेंहू की कटनी,

   तुम समोसे के साथ खाओ हरी चटनी।

 

19. गोवा मे एक नदी है, नाम है जिसका मांडवी,

   क्या कभी खाये हो तुम लजीज खांडवी।

  

20. साँप का जानी दुश्मन होता है नेवला,

   खा के तो देखो कभी लाजवाब थेपला।

 

21. धीरे धीरे लॉक डाउन हो रहा चुस्त दुरुस्त,

   इसलिए रहो घर मे और खाओ दम पुख्त।

 

22. लॉक डाउन मे परास्त हो गए बड़े बड़े सूरमा,

   क्या कभी खाया है भोजपुर का प्रसिध्द ख़ुरमा।

 

23. बाहर निकल क्यों दिखा रहे पुलिस को ठेंगा,

   बहुत ही मुश्किल है बनाना फिश टेंगा।

  

24. अनारकाली के प्रेमी का नाम था सलीम,

   अमां मियाँ ! कभी खा के तो देखो हलीम।

 

25. अगर हो बाहर मे पुलिस की लाठी चखनी,

   तो खा के घर से निकलो दाल मखनी।

  

26. पुलिस अच्छे अच्छे को बना देती है तोतला,

   बचना हो तो हमेशा खाया करो ढोकला।

  

27. मेरे पास आओ ! तुम्हें कुछ है दिखाना,

   दाल के तड़के मे डाला करो हमेशा मखाना।


28. क्यों हमेशा बने रहते हो लकीर के फकीर,

   घर मे ही रहो, बना के खाओ शाही पनीर।

  

29. क्या कभी ठहरे हो ले कर होटल मे रूम,

   तब तो तुमने जरूर खाया होगा मशरूम।

 

30. द अफ्रीका के क्रिकेट मैदान का नाम है सेंचुरियन,

   इसलिए खेलो क्रिकेट हमेशा खाके मंचुरियन।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Tarun Anand

Similar hindi poem from Abstract