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तरुण आनंद

Abstract


4.3  

तरुण आनंद

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भारतीय रेल को समर्पित

भारतीय रेल को समर्पित

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रुकी वो इसलिए कि प्राण बच जाए,

चली भी वो इसलिए कि प्राण बच जाए ।

बनाया खुद को अस्पताल,

क्योंकि जिंदगी का सवाल बच जाए ।

बच्चों को लेकर चली,

कि नई पीढ़ी का नौजवान बच जाए ।

चली मज़दूरों को लेकर,

की पसीने का मान बच जाए ।

दौड़ेगी जल्द ही देश की धड़कन,

फिक्र सिर्फ इतनी की अपना हिंदुस्तान बच जाए ।



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