जीते जी तेरहवीं का लाइव टेलीकास्ट" (हास्य कविता)
जीते जी तेरहवीं का लाइव टेलीकास्ट" (हास्य कविता)
आदरणीय “StoryMirror ”मंच को प्रणाम के साथ स्वरचित मौलिक हास्य कविता सादर समर्पित !विषय और भाव
कविता मृत्यु जैसे गंभीर विषय को हास्य-व्यंग्य के चश्मे से देखती है। "झूठमूठ मरकर" कवि समाज का लाइव रिएक्शन टेस्ट करना चाहता है। यह आज के 'दिखावे' और 'सोशल मीडिया युग' पर करारी चोट है — जहाँ RIP स्टेटस भी जीते जी देख लेने की चाहत है।दिनाँक:18 जून 2026---------------------------"जीते जी तेरहवीं का लाइव टेलीकास्ट"(हास्य कविता)डॉ॰ लक्ष्मण झा ‘परिमल’==================झूठ ही सही,
मुझे एक दिन के लिए मरना है
वैसे तो एक दिन सच में मरना ही होगा
पर आज? आज तो ट्रेलर देखना है!थोड़ी देर को सांस रोक लूँगा
आँख मूंदकर लेट जाऊँगा
देखूँगा कौन रोता है, कौन रील बनाता है
सच का मातम भला देखने को मिलता किसे है?दबी आँखों से झाँकूंगा —
कौन बोला, “गंगा ले चलो, मोक्ष मिलेगा”
कोई चिल्लाया, “अरे हिजला नदी ही काफी है,
डीजल महँगा है भइया!”कोई बोला, “बेटी-दामाद को बुलाओ,
बेटा तो बेंगलुरु में मीटिंग में फँसा है”
कोई तारीफ में बह गया,
“फौजी थे, कवि थे, डॉक्टर भी थे...
मल्टीटैलेंटेड बॉडी थी!”उधर पीछे से आवाज़ आई,
“चलो अच्छा हुआ, निपट गए
बच्चे इनसे ऐसे कतराते थे
जैसे सरकार टैक्स से...
इसीलिए दिल्ली-बंगलोर भागे रहते थे!”पंडित जी आए, पर्ची पकड़ाई —
“पलंग, कुर्सी, चादर, बर्तन, फ्रिज
और पाँच सौ एक ब्राह्मण भोज
तभी आत्मा को WiFi मिलेगा स्वर्ग में!”पर मुसीबत ये कि कोई पास न आया
सब बोले, “कोरोना का केस तो नहीं?”
मुझे डर लगा, कहीं PPE पहनाकर
फटाफट फूँक न दें!फिर मैंने धीरे से खाँस दिया
एक पैर का अंगूठा हिला दिया
भीड़ चिल्लाई, “चमत्कार हो गया!
परिमल जी यमलोक से रिटर्न टिकट ले आए!”यमलोक-वमलोक मैं क्या जानूँ भाई
मुझे तो बस जीते जी अपना
'RIP Status' देखना था
और तेरहवीं का मेन्यू फाइनल करना था!===================डॉ॰ लक्ष्मण झा ‘परिमल’दुमकाझारखंड
